पिछले तूफान ‘सेन्यार’ (Senyar) के बाद अब एक नए मौसमी सिस्टम की आहट सुनाई दे रही है, जिसका सीधा असर देश के कई राज्यों पर पड़ने वाला है। बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर मौसमी हलचल तेज हो गई है, जो 27 से 29 नवंबर के बीच भारत के मौसम में बड़ा बदलाव लाएगी। जहां उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की कमी के बाद अब उनके आने का क्रम बढ़ेगा, वहीं दक्षिण में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का दक्षिणी हिस्सा सक्रिय है।
तूफान ‘सेन्यार’, जिसे संयुक्त अरब अमीरात ने नाम दिया था, मलक्का जलडमरूमध्य (मलेशिया और इंडोनेशिया के पास) में बना था और यह अपनी क्षमता खोकर वहीं पर कमजोर होकर बिखर जाएगा। यह तूफान भारत की ओर नहीं बढ़ेगा, इसलिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इसकी वजह से बारिश की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को अभी इंतजार करना होगा।
हालांकि, बंगाल की खाड़ी में श्रीलंका के तटों के पास एक नई कम दबाव का क्षेत्र (Well Marked Low Pressure Area) बन चुका है। यह प्रणाली उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगी और अगले 24-48 घंटों में डिप्रेशन और फिर 30 नवंबर के आसपास डीप डिप्रेशन या चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकती है।
इस नई मौसमी प्रणाली का सबसे अधिक और सीधा असर दक्षिणी राज्यों पर दिखाई देगा। 27 नवंबर से ही तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटों पर तूफानी हवाएं चलनी और ऊंची लहरें उठनी शुरू हो गई हैं। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। 29 नवंबर के आसपास जब यह सिस्टम तटों के करीब पहुंचेगा, तो दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश (जैसे नेल्लोर, मछलीपट्टनम) और तमिलनाडु (चेन्नई, पुदुचेरी) के तटीय इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की आशंका है, जिससे सामान्य जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हो सकता है। आंतरिक तमिलनाडु, केरल और रायलसीमा के भागों में भी कई स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना है।
यह प्रणाली केवल दक्षिण तक सीमित नहीं रहेगी। 29 नवंबर तक, इसके प्रभाव से बादल मुंबई से लेकर पूर्वी गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, और उत्तर प्रदेश समेत पूर्वी क्षेत्रों तक फैल जाएंगे। ये हाई क्लाउड होंगे, जिससे धूप छनकर आएगी और मौसम धुंधला और ठंडा महसूस होगा। हवा की रफ्तार कम होने के कारण इन क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, उत्तर भारत के पहाड़ों पर मौसम साफ और शुष्क बना रहेगा, लेकिन वहां तापमान गिरने से अब कड़ाके की ठंड महसूस होगी।